
तुझे ओढ़ लूँ या तेरा जिसम का लिबास हो जाऊँ....
तेरी रंगों में ढल कर मैं एक अहसास हो जाऊँ....
एक रात जो मिले मुझे तेरे हुसैन-ओ-नज़ाकत की....
तू समंदर बन जाये मेरी लिए और मैं प्यासा हो जाऊँ....
तेरे वजूद से रहे मेरी चेहरे पे खुशियों की चमक..
तेरा चेहरा जो न देखों तो पल भर में उदास हो जाऊँ...
फ़क़त इतनी सी खवाहिश है क तेरी ज़िन्दगी में
शामिल हों....
फिर भले से ज़िन्दगी का क़िस्सा बनू या मैं कियास
हो जाओं...
तेरे लब तेरे हाथ तेरे जिस्म मेरा एक एक नक़्श अमर कर लें
तू मुझे पल भर भुला न पाए और मैं तेरे लिए इतना ख़ास
हो जाओं...