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LoveMasti Shayari
Source: Google news

शरीर से आत्मा का क्या सम्बन्ध है?

शरीर और आत्मा.......

~ आत्मा और शरीर ~
शरीर पाँच तत्व से बना हैं :- पृथ्वी, जल, हवा, आग, आकाश
आत्मा पाँच तत्व से बना हैं :- इलैक्ट्रोन, मेग्नेट, लाइट, वेव, केमिकल
मैं दिन के 2 बजे चैन से सो रहा था और सपना भि देख रहा था। अपने सपने में, मैं मिलों दूर एक जंगल में एक खाली जगह में क्रिकेट खेल रहा था। बहुत सारे लोग क्रिकेट देखने के लिए मैदान के चारों ओर खड़े थे। खेल शुरू हुआ। लेकिन कुछ देर खेलने के बाद मेरी आत्मा को एक सूचना मिली, "जल्द ही अपने शरीर में जाओ क्योंकि शरीर में कुछ समस्या उत्पन्न हो गई है।"
समाचार सुनते ही तेजी से मेरी आत्मा वहां से शरीर की ओर चल परी। मेरी आत्मा एक फुटबॉल की तरह गोल आकार में तब्दील हो गई और हवा में उड़ गई। और पलक झपकते ही मेरी आत्मा मेरे घर के भवन के पास थी।
अब मेरी आत्मा भवन के ऊपर से आंगन में और आंगन से कमरे तक पहुंच गई। मेरी आत्मा, जो वृत्ताकार रूप में थी, अब मानव आकृति के रूप में पलंग पर खड़ी हो गई। अब मेरी आत्मा के सामने शरीर पड़ा हुआ था। मेरी आत्मा ने देखा कि कमरे का दरवाजा खुला हुआ है और आंगन में कोई मौजूद नहीं है। मैंने अपनी आत्मा को देखा। वह पूर्ण मानव आकृति के रूप में खड़ा था जैसे कि कोई छाया हो और खुद मे भार महसूस नही कर रहा था। ऐसा लगा जैसे मैं लगभग हवा की तरह हल्का हूँ।
मेरा शरीर सिर से पांव तक पूरी तरह जम गया था। शायद सुन्नता हो गयी थी। अब मेरी आत्मा शरीर के पास बैठ गई। और तब अपने सिर पर हाथ रखकर, अपार दुख और चिंता करते हुए बोला, "अब मैं अपने शरीर को कैसे जगाउ? क्या हम इसे जगा पाएंगे? खैर जगाने की कोशिश करते हैं!" फिर मेरी आत्मा ने मेरे शरीर को एक हाथ पर अपना एक हाथ रखकर हिलाने की कोशिस किया लेकिन हाथ को हिलाने-डुलाने के बावजूद भी कोई हरकत नहीं हो पायी । तब मेरी आत्मा ने एक पैर को हिलाने का सोचा। मेरी आत्मा ने पैर हिलाने के लिए मेरे शरीर के आधे हिस्से में लेट गया। लेकिन फिर भी मेरी आत्मा ने पैर और हाथ में कोई हलचल या कम्मपन लाने में सफल नहीं हो पायी।

अब शरीर को जाग्रत अवस्था में लाने की उत्सुकता बहुत ज्यादा बढ़ गई। और तब मेरी आत्मा पूरे शरीर में प्रवेश कर अधिकतम आंतरिक दबाव देने लगा। इस बीच, मेरी आत्मा को मेरे शरीर का मृत्यु ना हो जाए इसका गम भी सता रहा था। अब मैं शरीर के अंदर था। इसलिए मेरी आत्मा की सोच समाप्त हो गई थी। अब मेरी आत्मा पूरे शरीर को हिलाने-डुलाने की कोशिश में जुटी रही, फिर लगभग 4-5 मिनट के अथक प्रयास के बाद मैं अपने शरीर को जगा सका। मैं उठा और अपने हाथ से पूरे शरीर को रगड़ने लगा, कुछ देर ऐसा करने के बाद रक्त संचार बढ़ गया और मैं वहाँ से उठकर टहलने चला गया।
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